राष्ट्रीय एकजुटता दिवस

राष्ट्रीय एकजुटता दिवस या National Solidarity Day भारत औऱ चीन के बीच हुए युद्ध की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है।

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कब और क्यों मनाया जाता है

यह दिन हर साल 20 अक्तूबर को भारत और चीन के बीच युद्ध में देश की एकजुटता दिखाने के लिए मनाया जाता है। 

दिन का उद्देश्य राष्ट्र की रक्षा के लिए युद्ध के दौरान हमारे लोगों की एकजुटता, एकता और अखंडता की स्मृति का जश्न मनाना है।  इसलिए, राष्ट्रीय एकजुटता दिवस की मान्यता केंद्रीय एकजुटता और बधाई का वार्षिक दिवस है।

भारत चीन युद्ध, 1962

  • चीन अपनी आज़ादी के समय से ही पड़ोसियों के साथ अच्छे सम्बंध बनाने की बात करता था।
  • भारत औऱ चीन भी एक दूसरे के साथ बेहतर सम्बंधों को आगे बढाने के साथ साथ, सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्तों को मज़बूत करने में लगे हुए थे।
  • 1954 में दोनों देशों के बीच पंचशील के सिद्धांतों का उदय हुआ, जिसमें भारत ने तिब्बत पर चीन के अधिकार को स्वीकार कर लिया था।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और सम्मेलनों में भारत ने चीन का कई बार प्रतिनिधित्व किया और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहतु ने हिंदी-चीनी भाई भाई का नारा दिया।
  • भारत ने 1958 में अक्साई चीन को खूद का क्षेत्र और 1959 में दलाई लामा को शरण दी, जिसको चीन ने अपने खिलाफ एक साजिश के रूप में देखा। यहीं से भारत और चीन के बीच कड़वाहट का जन्म हुआ।
  • 1960 में चीन ने भारत से अक्साई चीन पर अपने अधिकार छोड़ने के लिए कहा, जिसके बदले में चीन ने भारत के उत्तरी इलाकों में अपना अधिकार छोड़ने के लिए आफर दिया। जिसको जवाहर लाल नेहरू ने ठुकरा दिया।

1962 भारत चीन युद्ध के दौरान भारतीय सैनिक

  • 20 अक्तूबर 1962 को चीन ने लगभग 80,000 सैनिकों के साथ भारत पर आक्रमण कर दिया, जिनका सामना करने के लिये भारत के सिर्फ 10,000 सैनिक ही बॉर्डर पर तैनात थे।
  • परिणामस्वरूप भारत के हाथ से अक्साई चीन चला गया और 21 नवम्बर 1962 युद्धविराम की घोषणा हो गयी।

युद्ध के परिणाम

भारत की हार के बाद सैनिक स्तर पर बड़े सुधारों की जरूरत महसूस हुई। इसी के चलते भारत मे आधुनिक हथियारों का प्रोडक्शन, नई तकनीक और न्यूक्लियर हथियार के टेस्ट हुए।

1966 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में बनी एक कमेटी ने 20 अक्तूबर के दिन को राष्ट्रीय एकजुटता दिवस के रूप में मान्यता दी थी।

राष्ट्रीय एकता दिवस का पालन, मौलिक एकता का एक वार्षिक अनुस्मारक है। इस दिन, पूरे राष्ट्र के विचार हमारे सशस्त्र बलों की ओर मुड़ते हैं, जो हमारी व्यापक सीमाओं की रक्षा करते हैं और जो पूरे इतिहास में अपने साहस और सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं।

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