Holi date history significance celebrations होली का त्योहार तारीख इतिहास महत्व

होली का त्यौहार हिंदुओं द्वारा फाल्गुन मास में मनाया जाता है जो प्रायः मार्च महीने में आता है।

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होली क्या है और कैसे मनायी जाती है

होली कैसे मनाई जाती है

होली का त्योहार लोग आपस में मिलकर, गले लगकर और एक दूसरे को रंग लगाकर मनाते हैं। इस दौरान धार्मिक और फागुन गीत भी गाये जाते हैं। इस दिन लोग खासतौर से बने गुजिया, पापड़, हलवा, आदि खाते हैं। रंग की होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। 

यह मुख्य रूप से उत्तर भारत मे हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला त्यौहार है, इसको प्यार का त्यौहार, रंगों का त्यौहार और पतझड़ का त्यौहार भी कहा जाता है।

होली के दो पड़ाव होते हैं

  1. होलिका दहन : यह दिन होली की शुरुआती रुआत होती है। इस दिन होलिका नामक एक राक्षसी के जलने के दिन के रूप में मनाया जाता है। होलिका, हिरण्यकश्यप राक्षस की बहन थी जो अपने भाई के कहे अनुसार अपने भतीजे प्रह्लाद को जलाने के उद्देश्य से जलती अग्नि में बैठ गयी थी। लेकिन भगवान विष्णु की कृपया से प्रह्लाद की जगह होलिका जलकर राख हो गयी। उसी दिन को आज भी बुराई को खत्म करने के दिन के रूप में मनाया जाता है। 

होलिका दहन

होलिका दहन का मुहूर्त 20:58 से 24:34
समय अवधि 3 घंटा 36 मिनिट 
भद्रा पूंछा 17:24 से 18:25
भद्रा मुख 18:25 से 20:07
होलिका दहन का शुभमुहूर्त (मार्च 2021 में)

आज भी हिंदुओं में लकड़ी, गोबर के उपलों और घास आदि को जलाकर होलिका दहन किया जाता है तथा बुराई को खत्म करने का प्रण किया जाता है। इस दिन को छोटी होली भी कहा जाता है।

2. रंग वाली होली: इसको दुल्हेंडी भी कहा जाता है और होलिका दहन से अगले दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग एक दुसरे पर रंग, गुलाल, रंगीन पानी आदि डालकर होली मनाते हैं और भेदभाव को मिटाने की कोशिश करते हैं। इस दिन को मनाने का लक्ष्य समाज से भेदभाव और दुश्मनी को खत्म करना है। इस दिन लोग धर्म, जाती, वर्ण और रंग को भूलकर बिना किसी भेदभाव के एक दुसरे को रंग लगाते हैं। 

होली कब मनाई जाती है

यह त्यौहार हिन्दू कैलेंडर के फाल्गुन मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो मार्च महीने के बीच मे आता है। इसके अलावा यह त्यौहार सर्दी के जाने तथा पतझड़ आने का दिन होता है। 2021 में होली मार्च 28 और 29 को मनाई जाएगी।

होली क्यों मनाई जाती है?

होली मनाने के पीछे पौराणिक कहानियां हैं, जिनका जिक्र हिन्दू ग्रन्थों में मिलता है। 

होलिका दहन की कहानी

पुराने समय में हिरण्यकश्यप नाम का एक बहुत शक्तिशाली राक्षस होता था, जो ब्रह्मा जी द्वारा वरदान पाकर बहुत शक्तिशाली हो गया, जिसके कारण उसकी क्रुरता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी। वह भगवान विष्णु को खुद का सबसे बड़ा दुश्मन समझता था, इसलिए भगवान विष्णु के हर उपासक को ढूंढ ढूंढ कर मार देता था। लेकिन भगवान की कृपया से उसके घर एक पुत्र पैदा हुआ जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया।

प्रह्लाद भगवान विष्णु जी का बहुत बड़ा भगत था। इसी कारण हिरण्यकश्यप, प्रह्लाद को मारने के लिए षड्यंत्र करता था, लेकिन भगवान विष्णु की कृपादृष्टि से प्रहलाद का कुछ नुकसान नहीं हुआ। हिरण्यकश्यप की एक बहन थी – होलिका। जिसको आग में न जलने के वरदान था। वह प्रहलाद को गोद में लेकर जलती चिता में बैठ गयी। लेकिन भगवान की इच्छा से होलिका तो आग में जल गई लेकिन प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ। उसी दिन से लोग होलिका दहन को बुराई खत्म करने के दिन के रूप में मनाते हैं।

बरसाना की लठ मार होली

रंगों वाली होली की कहानी

भारत के ब्रज क्षेत्र में रंगों की होली का त्यौहार श्रीकृष्ण औऱ राधा जी के प्रेम के रूप में मनाया जाता है। भगवान श्री कृष्ण सांवले रंग और राधा जी गोरी थी। इसी से घबराकर श्री कृष्ण जी ने माता यशोदा को कहा था कि उनके सांवले रंग के कारण राधा उनको पसन्द नहीं करेगी।

इस पर यशोधा जी ने श्री कृष्ण को अपने चेहरे पर रंग लगाने की सलाह दी थी। तब से लेकर ही ब्रज में रंगों वाली होली एक प्रेम के त्योहार के रूप के मनाई जाती है।

होली का इतिहास

यद्यपि एकदम सही तारीख बताना सम्भव नहीं है लेकिन होली का त्यौहार अति प्राचीन है। इतिहासकारों का मानना है कि आर्यों में होली का चलन था। इसके साथ नारद पुराण औऱ भविष्य पुराण में भी होली का जिक्र है।

सुप्रसिद्ध मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने भी अपने ऐतिहासिक यात्रा संस्मरण में होलिकोत्सव का वर्णन किया है। भारत के अनेक मुस्लिम कवियों ने अपनी रचनाओं में इस बात का उल्लेख किया है कि होलिकोत्सव केवल हिंदू ही नहीं मुसलमान भी मनाते हैं। सबसे प्रामाणिक इतिहास की तस्वीरें हैं मुगल काल की और इस काल में होली के किस्से उत्सुकता जगाने वाले हैं। अकबर का जोधाबाई के साथ तथा जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन मिलता है। अलवर संग्रहालय के एक चित्र में जहाँगीर को होली खेलते हुए दिखाया गया है।

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होली कितने देशों में मनाई जाती है

उत्तर भारत और नेपाल के अलावा होली दुनिया के अलग अलग देशों जैसे त्रिनिदाद, सुरिनेम, फिजी, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, न्यूजीलैण्ड, दक्षिण कोरिया औऱ यूरोप के कुछ देशों में भी मनाई जाती है। जहां भी भारतीय लोग रहते हैं, वहां इस त्यौहार को बड़े चाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

होली, दक्षिण कोरिया में

होली, ऑस्ट्रेलिया में

होली, अमेरिका में

हिंदी में Holi songs

क्रमगानाफ़िल्म
1होरी खेले रघुवीराबागबान
2रंग बरसे सिलसिलासिलसिला
3होली के दिनशोले
4आज ना छोड़ेंगेकटी पतंग
5ब्लम पिचकारीये जवानी है दीवानी
6Do me a favorवक्त
7अंग से अंग लगानाडर
8सोनी सोनीमोहबतें
9होली स्पेशल गानेGaana.com

होली का क्या महत्व है

बुराई पर अच्‍छाई की जीत की प्रतीक होली का सामाजिक महत्‍व भी है। यह एक ऐसा पर्व होता है जब लोग आपसी मतभेद भुलाकर एक हो जाते हैं। मान्‍यता है कि इस दिन अगर किसी को लाल रंग का गुलाल लगाया जाए तो सभी तरह के मनभेद और मतभेद दूर हो जाते हैं। क्‍योंकि लाल रंग प्‍यार और सौहार्द का प्रतीक होता है।

Comments

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