आदतें क्या होती हैं और कैसे बनाते हैं

हमारे व्यवहार को अनजाने में हमारी Habits ही control करती हैं

आदतों के उदाहरण

आखरी बार कब आपने बिना सोचे समझे ही कोई काम कर लिया था। जैसे बिना सामने देखे सीढ़ियों से नीचे उतरना, मोबाईल में देखते हुए सड़क पर चलना, सोते हुए सांस लेना, चलते हुए सोचना आदि। ये सब हमारी आदतें होती हैं, जिनको हमने ओर हमारे पूर्वजों ने हज़ारों सालों के विकास से सीखा है। हमारी वास्तविक जिंदगी में भी हमारी स्तिथि, आदतों की ही देन हैं। चाहे आप सुखी हो या दुखी हो, सफल हो या असफल हो, सब कुछ इन्हीं छोटी छोटी आदतों की देन है।

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छोटी छोटी habits मिलकर ही एक बड़ा बदलाव लाती हैं

उदाहरण के लिए जब किसी Metal को तोड़ने के लिए हम बार बार हथोड़े से उसपे चोट करते हैं, तो आखरी चोट में वो टुकड़ा टूट जाता है। अंत मे सिर्फ एक चोट से टुकड़ा टूट गया लेकिन ये सब उन पहले वाली छोटी छोटी चोटों की वजह से सम्भव हुआ है। उसी प्रकार हमारे जीवन के परिणाम भी हर रोज़ अभ्यास की गई आदतों की वजह से मिलते हैं। अगर हमारी आदतें अच्छी हैं तो परिणाम अच्छे मिलेंगे और बुरी हैं तो बुरे।

Habits का बदलाव दिखने में समय लगता है

हम सोचते हैं कि हमारे किये गए काम का परिणाम एक सीधी लाइन में मिलता है। जबकि बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए हमे लगातार मेहनत करने की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए आपको अगर मोटापा कम करना है, उसके लिए आपने शारिरिक मेहनत शुरू कर दी। तो उसके परिणाम ऐसे नही होंगे कि आप हर हफ्ते 2 किलो वजन कम करते करते 2 महीने में ही 16 किलो वजन कम कर लोगे। वास्तविकता में परिणाम कभी कम तथा कभी ज्यादा होंगें।

वास्तविकता में परिणाम प्राप्ति के अलग अलग स्तर इस प्रकार होते हैं। बीच बीच मे हमे निराशा भी मिलेगी, लेकिन लगातार मेहनत करते रहने से आखिरकार हम सफल होंगे। ( सोर्स: Jamesclear.com)

आदतें बदलने के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या है

आदतें बदलने को लेकर अलग अलग Theory इस दुनिया मे उपलब्ध हैं। लेकिन किसी आदत को बदलने के लिए सबसे जरूरी चीज है, बारम्बार उस काम को करना। उदाहरण के लिए अगर आप हर रोज़ Morning Walk की आदत बनाना चाहते हैं, तो बजाए इसके की आपके 2 हफ़्तों तक लगभग 7 बार सुबह walk के लिए जाएं, आपको एक हफ्ते में सातों दिन walk पर जाना चाहिए। जिससे आपकी आदत बदलने की सम्भावना ज्यादा होगी।

यहां आत्मनिर्भता का मतलब, किसी काम के अपने आप करने से है। जितना भी हम किसी काम को बारम्बार करते हैं, उसके ऑटोमेटिक होने की सम्भावना उतनी ही बढ़ जाती है , और अंत मे वह काम एक आदत में परिवर्तित हो जाता है। (Source : Jamesclear.com)

आदतों के प्रकार

आदतें मूल रूप से 2 प्रकार की होती हैं।

1.पहचान आधारित आदतें

ये आदते हमारी पहचान से जुड़ी होती हैं। पहचान देेेश, परिवार, जाति, धर्म और लिंग के आधार पर होती हैं। पहचान आधारित आदतों के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं :

  • जैसे भारत देश में फर्श पर बैठकर खाने की आदत है, जबकि युरोपीयन देशों में कुर्सी ओर मेज का चलन है।
  • हो सकता है आपके परिवार में खाने से पहले पूजा करने का चलन हो और किसी और के परिवार में ना हो।
  • खासकर भारत देश मे जातियों के आधार पर आदतों में बहुत अंतर पाया जाता है, जैसे ब्राह्मण लोग जनेऊ धारण करते हैं, जबकि अन्य कोई जाति ऐसा नहीं करती है।
  • धर्म के आधार पर आदतों में फर्क पूरी दुनिया मे जगजाहिर है। इसके लिए किसी उदाहरण की जरूरत नहीं है।
  • लिंग के आधार पर आदतें अलग अलग होती हैं। जैसे महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा सहानुभूति ज्यादा पाई जाती है।

2.कर्म आधारित आदतें

ये आदतें हमारे कार्यो की देन होती हैं। अलग अलग काम के साथ अलग तरह की भावनाएं जुड़ी होती है। जैसे:

  • एक डॉक्टर की आदत अपने मरीज के साथ भावनात्मक तौर पर जुड़ने की होती है जबकि एक कसाई अपने काम के साथ लगाव नहीं रख सकता।
  • एक इंजीनियर में धूम्रपान और शराब पीने की आदतें ज्यादा होती हैं जबकि एक अध्यापक में ऐसी आदतें कम होती हैं।
  • वैसे ही एक राजनीतिक आदमी में झूठे वादे करने और ज्यादा बोलने की आदत होती है, जबकि एक वैज्ञानिक शांत रहके काम करना पसंद करता है।
  • एक पुजारी में सुबह शाम शनान करना, सात्विक भोजन करना और भगवान का ध्यान करना आदि आदतें सामान्य होती हैं, जबकि एक पहलवान में ये सब आदतें मिलना मुश्किल होता है।
  • एक उद्योगपति को पूरी टीम को साथ मे लेकर काम करना पसंद होता है, इसके विपरीत एक मैकेनिक को अकेले काम करना अच्छा लगता है।

आदतें कैसे बनाते हैं

हमारी रोजमर्रा की Habits के पीछे के क्या कारण होते हैं

आदतें हमारी पहचान और कर्म के आधार पर अलग अलग हो सकती हैं। अच्छी आदतें हमे खुशी और बुरी आदतें हमारे दुख का कारण बनती हैं।

आदतों पर शोध

मनोवैज्ञानिक एडवर्ड थोर्नडिक में 1898 में बिल्लियों पर एक प्रयोग किया था। जिसने आदतों और व्यवहार के बारे में हमारी आधुनिक सोच को जन्म दिया है। उसने एक बिल्ली को एक बॉक्स में बंद कर दिया तथा बॉक्स के बाहर एक खाने का कटोरा रख दिया। बिल्ली एक लिवर को दबाकर बॉक्स से बाहर आ सकती थी, औऱ खाना खा सकती थी।

थोर्नडिक का प्रयोग आदतों के प्रभाव और कारण के बारे में

उन्होंने बहुत सारी बिल्लियों पर यह प्रयोग किया और नतीजा निकाला कि जितनी बार भी हम किसी काम को करते हैं, वह हमारी आदत बन जाता है और हमारे दिमाग मे स्टोर हो जाता है। उदाहरण के लिए एक बिल्ली ने शुरुआत में दरवाजा खोलने के लिए 160 सेकंड लिए जबकि 25वीं बार दरवाजा खोलने में सिर्फ 7 सेकंड। इससे यह साबित हो जाता है कि आदतें हमारे जीवन मे कितनी महत्वपूर्ण हैं।

Habits कैसे बनती हैं

किसी भी आदत को बनने के लिए 4 मुख्य पड़ावों से गुजरना पड़ता है। पहला स्तर है – संकेत, दूसरा – लालसा, तीसरा – प्रतिक्रिया और चौथा पड़ाव है – ईनाम। हर काम को करने के लिए हमारा दिमाग बार बार इस चक्र को दोहराता है।

आदत को बनने के लिए 4 पड़ावों से गुजरना होता है। पहले हमें संकेत मिलता है, फिर लालसा, जिसके ऊपर हम प्रतिक्रिया करते हैं, और उसका इनाम हमे मिलता है।

1. संकेत

  • सबसे पहले संकेत (Cue), जो व्यवहार को शुरू करने के लिए आपके मस्तिष्क को ट्रिगर करता है।
  • यह एक जानकारी है जो एक इनाम की अपेक्षा को दर्शाती है। हमारे पूर्वजों ने जीने के लिए उन संकेतों पर ध्यान दिया था जो भोजन, पानी और सेक्स जैसी प्राथमिक जरुरतों के स्थान का संकेत देते थे।
  • आज, हम अपना अधिकांश समय संकेतों के बारे में सीखने में बिताते हैं जो पैसा और प्रसिद्धि, Power और Fame, प्रशंसा, प्यार और दोस्ती, या व्यक्तिगत संतुष्टि की भावना जैसे पुरस्कारों की तरफ इशारा करते हैं।
  • संकेत आदत के लिए नही होते बल्कि परिवर्तन की इच्छा के लिए होते हैं।
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2. लालसा

लालसा दूसरा चरण है, और वे हर आदत के पीछे का प्रेरक कारण हैं। प्रेरणा या इच्छा के बिना – परिवर्तन की लालसा के बिना – हमारे पास कार्य करने का कोई कारण नहीं है।

आप आदत के लिए, बल्कि अपनी वर्तमान स्थिति में आने वाले बदलाव के लिए तरसते हो।

  • लोग सिगरेट पीने की लालसा नहीं रखते हैं, इसके द्वारा राहत प्राप्त करने की भावना को तरसते हैं।
  • आप अपने दांतों को ब्रश करने से प्रेरित नहीं होते हैं, बल्कि एक साफ मुंह की भावना से प्रेरित होते हैं।
  • आप टेलीविजन नहीं चलाना चाहते हो, बल्कि मनोरंजन करना चाहते हैं।
  • लालसा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकती है। एक शराबी के लिए, शराब की Smell एक शक्तिशाली प्रेरक हो सकती है, जबकि शराब न पीने वाले व्यक्ति के लिए यह smell बस दुर्गंध के सिवा कुछ भी नहीं है।

3. प्रतिक्रिया

तीसरा चरण प्रतिक्रिया है। प्रतिक्रिया वह वास्तविक आदत है जो आप करते हैं, जो एक विचार या एक क्रिया का रूप ले सकती है।

  • प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करती है की आप उसे करने के लिए कितने प्रेरित हैं या कितना नापसंद करते हैं।
  • यदि किसी विशेष काम के लिए आपको अपनी इच्छा से अधिक शारीरिक या मानसिक प्रयास की आवश्यकता है तो आप ऐसा नहीं करेंगे।
  • आपकी प्रतिक्रिया आपकी क्षमता पर भी निर्भर करती है। यह सरल लगता है, लेकिन एक आदत केवल तभी हो सकती है जब आप इसे करने में सक्षम हों। यदि आप एक खिलाड़ी नही हो लेकिन क्रिकेट खेलना चाहते हो तो, बहुत अधिक सम्भावना है कि आप ये नहीं कर पाओगे।

4. ईनाम

अंत में, प्रतिक्रिया इनाम देती है। पुरस्कार हर आदत का अंतिम लक्ष्य होते हैं। संकेत इनाम देने के बारे में है।लालसा इनाम पाने की इच्छा है। प्रतिक्रिया इनाम प्राप्त करने के बारे में है।

  • हम पुरस्कार का पीछा करते हैं क्योंकि वे दो उद्देश्यों को पूरा करते हैं: (1) वे हमें संतुष्ट करते हैं और (2) वे हमें सिखाते हैं।
  • पुरस्कारों का पहला उद्देश्य आपकी लालसा को पूरा करना है।
  • दूसरा, पुरस्कार हमें सन्तुष्ट करने वाली आदतों को याद रखने में मदद करते हैं। जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हमारा दिमाग सारे ईनामों को याद रखता है, और अच्छे लगने वाले इनामों को हमारी आदत बना देता है।
  • पुरस्कार के अपने आप लाभ भी होते हैं। भोजन और पानी आपको जीवित रहने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं। प्रमोशन मिलने से ज्यादा पैसा और सम्मान मिलता है। फिटनेस प्राप्त करने से आपके स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • इनाम का तत्काल लाभ यह है कि यह लालसा शांत करता है। चाहे वह कुछ खाने की है, प्रमोशन हासिल करने या किसी का भरोसा जीतने की।

सवाल जवाब

आदतें क्या होती हैं?

हमारी वो प्रतिक्रिया या व्यवहार होती हैं, जिनको हमने बारम्बार करके Automatic बना लिया होता है।

आदतें कैसे बनती हैं

आदतें बनने के लिए मुख्य रूप से 4 चरण होते हैं – संकेत, लालसा, प्रतिक्रिया और ईनाम। अगर इन चारों में से एक भी पड़ाव गायब होता है, तो वह काम हमारी आदत नही बन पाएगा।

क्या हम आदतें बदल सकते हैं

बिल्कुल। क्योंकि आदतें हमारे द्वारा बार बार दोहराये गए एक Fixed व्यवहार की देन होती हैं, इसलिए उस व्यवहार में बदलाव करके हम अच्छी या बुरी आदतों को अपने अनुसार बदल सकते हैं।

आदतें बदलने के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

आदतों का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है

हमारी आदतें चक्रवर्धि ब्याज की तरह होती हैं। शुरुआत में इनके प्रभाव का पता नही लगता, लेकिन लम्बे समय मे ये आदतें हमारे जीवन को उनके हिसाब से अच्छा या बुरा बनाती हैं। अगर हम कुछ देर तक तनाव में होते हैं, तो इसका इतना प्रभाव नही पड़ता लेकिन यह तनाव लम्बे समय मे शरीर को बहुत बीमार कर सकता है। वैसे ही शारिरिक मेहनत करने की छोटी सी आदत से हमे कुछ फर्क नही पड़ता लेकिन यह आदत हमे लंबे समय तक फिट ओर स्वस्थ रहने में मदद करती है।

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Comments

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