इंसानों में भावनाएं कैसे पैदा होती हैं?

हमारे व्यवहार को निर्धारित करने वाली भावनाएं पैदा कैसे होती हैं

भावनाएं तंत्रिका तंत्र से जुड़ीं हुई वो प्रतिक्रियाएँ हैं जो जैविक परिवर्तनों से पैदा हुई हैं। यह विचारों, भावनाओं, व्यवहारिक प्रतिक्रियाओं और खुशी या नाराजगी के स्तर से जुड़ी होती हैं। वर्तमान में एक परिभाषा पर कोई वैज्ञानिक सर्वसम्मति नहीं है। (विकिपीडिया)।

Emotions की शुरुआत कैसे हुई है

ऐतिहासिक रूप भावनाऐं, हमारे logical दिमाग से पहले से प्राणियों मे उपलब्ध थीं। जैसे सबसे पहले के जानवरों में सूंघने की शक्ति एक भावना का ही उदाहरण है। 

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  • इंसानी दिमाग का जो हिस्सा अन्य प्राणियों जैसा है – Brainstem, रीढ की हड्डी के ऊपरी हिस्से से जुड़ा हुआ दिमाग का शुरुआती हिस्सा होता है। 
  • इसका काम शरीर की आधारभूत क्रियाएं करना है, जैसे सांस लेना, पाचन करना और अन्य साधारण क्रियाओं को नियंत्रित करना है। यह हिस्सा preprogrammed होता है, जिसको बदला नही जा सकता।
  • इसी Brainstem से हमारा शुरुआती भावनात्मक दिमाग पैदा हुआ है, जिसका काम सूंघकर फैसले लेना था, जैसे खाने, दुश्मन की पहचान और मिलन करने लिए साथी की तलाश आदि।
  • Mammals (जीवों का वह Group जिसका हिस्सा इंसान भी हैं) के जन्म के साथ ही आधुनिक भावनात्मक दिमाग का विकास हुआ, जिसको Limbic Brain कहा जाता है।
  • इंसानो में Amygdala (हर इंसान में दो होते हैं, दिमाग की दोनों तरफ), जो Limbic Brain का महत्वपूर्ण हिस्सा है, भावनाओं को पैदा करने के लिए ज़िम्मेदार है।

दिमाग का Limbic System जो भावनाओं के लिये जिम्मेदार है।

  • लगभग 10 करोड़ साल पहले Mammals में Thinking Brain यानी सोचने समझने वाले दिमाग का विकास हुआ, जिसको Neocortex कहा जाता है।
  • Neocortex के निर्माण के साथ ही प्राणियों में अपनी भावनाओं के बारे में सोचने की अद्भुत क्षमता पैदा हुई, तथा एक समस्या के लिए अलग अलग विकल्प चुनने की योग्यता का विकास हुआ।
  • यह Neocortex ही है जिसकी वजह से खतरा महसूस होने पर हम अपने बचाव के साथ साथ पुलिस को भी सूचित करने में सक्षम हैं।
  • Neocortex ने प्राणियों में नर मादा के बीच सेक्स के अलावा माँ बेटा जैसे सम्बधों को जन्म दिया। जिन जीवों में Neocortex नही होता है, जैसे Raptiles, उनमे आज भी पैदा होते ही बच्चों को छिपना पड़ता है, नही तो वो अपनी माँ के द्वारा ही खा लिए जाते हैं।
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Emotions पैदा करने में दिमाग क्या काम करता है

सबसे पहले एक संकेत हमारी Sensory System (आंख, नाक, आंख, त्वचा) द्वारा थालामस में जाता है, जहाँ से यह दिमाग की भाषा मे परिवर्तित होकर Neocortex में चला जाता है। Neocortex में ही संकेत का अध्ययन होता है और एक प्रतिक्रिया के लिए दिमाग के अलग अलग हिस्सों को संकेत भेजे जाते हैं। भावनात्मक प्रतिक्रिया के लिए Amygdala को संकेत मिलते हैं, जिसके हिसाब से शरीर को प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया जाता है। जैसे किसी खतरे की स्थिति में हाथों और पैरों में खून का प्रवाह तेज़ हो जाता है, जिससे बचाव किया जा सके औऱ समय आने पर भागा जा सके।

आंखों द्वारा देखा गया कोई संकेत, थालामस से visual cortex (दिमाग का वह हिस्सा, जो देखने के लिए ज़िम्मेदार है?) में जाता है। लेकिन इसके साथ ही उस संकेत का एक हिस्सा एक छोटे रास्ते से Amygdala में भी जाता है। जिस कारण हम किसी भी परिस्थिति में सबसे पहले भावनात्मक reaction देते हैं।

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अब सबसे आश्चर्यजनक बात जो जानने वाली है, वह है कि उसी संकेत का एक छोटा सा हिस्सा Direct, Amygdala में चला जाता है, एक छोटे रस्ते से, जिससे Amygdala को Neocortex से पहले प्रतिक्रिया करने का अवसर मिल जाता है। इसी का असर है कि हम कई बार कोई तेज़ आवाज सुनकर, alert हो जाते हैं, या भागने की कोशिश करते हैं जबकि बाद में पता चलता है कि वो आवाज किसी भी प्रकार से हमारे लिए खतरनाक नही थी। क्योंकि प्रतिक्रिया Amygdala की वजह से हुई थी, और खतरे का आंकलन बाद में हमारे Logical Brain यानी कि Neocortex ने किया है।

चूहों पर किये गए एक अध्ययन से स्पष्ट हो गया है कि Amygdala को प्रतिक्रिया देने में Neocortex की अपेक्षा सिर्फ आधा ही समय लगता है। हालाँकि इंसानों पर ऐसा कोई शोध अभी तक नही हुआ है, लेकिन अनुमान है कि यही अनुपात इंसानों की प्रतिक्रिया में भी होता है।

इससे यह साबित हो जाता है कि क्यों बार बार हम भवनाओं में बहकर, बिना सोचे समझे प्रतिक्रियाएँ देते हैं और उसके बाद खुद को कोसते हैं।

हमारे Logical Brain का विकास भावनात्मक दिमाग से होने के कारण, अभी तक प्रतिक्रियाओं में हमारा भावनात्मक दिमाग हावी है।

  • इसको साबित करने के लिए मनोवैज्ञानिक Joseph Ledoux ने चूहों में Neocortex के हिस्से Auditory Cortex (दिमाग का सुनने का हिस्सा) को damage कर दिया औऱ उनको एक तेज आवाज सुनाना शुरू कर दिया। आश्चर्यजनक तरीके से चूहे उस आवाज के लिए प्रतिक्रियाएँ करना सीख गए और उससे दूर भागने की कोशिश करने लगे। इससे यह साबित हो गया कि हमारी भावनाओं का एक अलग दिमाग होता है, जो बिना neocortex के भी प्रतिक्रियाएँ दे सकता है।
  • इस प्रयोग से हमारी उस सोच में परिवर्तन हुआ जिसमें हम सिर्फ Neocortex को ही सब क्रियाओं (भावनात्मक और तार्किक) का जनक मानते थे।
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Emotions क्यों जरूरी हैं

हालाँकि Amygdala की तीव्र प्रतिक्रिया की यह विशेषता विषम परिस्थितियों में आपकी जान भी बचा सकती है। जब आप 140 किमी/घन्टा की स्पीड से गाड़ी चला रहे हों, तो फैसला करने में कुछ milisecond की यही तेज़ी आपकी जिंदगी और मौत का सवाल बन सकती है।

  • Amygdala के काम करने का यह तरीका लाखों वर्षों के अनुवांशिक विकास का परिणाम है। सम्भवतः इसके कारण भूतकाल में बहुत प्राणियों की जान बच सकी होगी, जिससे दिमाग की कार्यशैली का यह pattern विकसित हुआ है।
  • मनुष्यों में शायद इसका इतना महत्व नहीं है लेकिन कुछ जीव जंतुओं में अभी भी उनकी शिकारियों से जान बचाने में यह प्रक्रिया बहुत सहायक है।
  • Amygdala के कारण ही हमें जीने की भावना, परिवार को बढाने की इच्छा और खुद को बेहतर बनाने की प्रेरणा मिलती है।
  • Joseph Ludoux ने कुछ चूहों के Amygdala को डैमेज कर दिया। आश्चर्यजनक रूप से चूहों में जीने की इच्छा समाप्त हो गयी। हालांकि वो चूहे खाने पीने में अच्छी तरह से सक्षम थे, फिर भी 5 से 6 दिन में सारे चूहे भूख और प्यास से मर गए।
  • एक जवान लड़का, जिसको दिमाग के दौरों से बचाने के लिए उसके Amygdala को निष्क्रिय कर दिया गया था। उसने भी चूहों की तरह प्रतिक्रिया दी। उसने अपने दोस्तों, रिश्तेदारों यहाँ तक अपनी माँ को भी पहचानने से इनकार कर दिया। वह बिल्कुल अकेला रहने लगा। उसे इंसानों से कोई लगाव नही रहा।

Emotions याद कैसे रहती हैं

  • इंसानों में भवनाओं को स्टोर करने के लिए Limbic Brain का हिस्सा Hipocumpus जिम्मेदार होता है।
  • यह हिस्सा किसी भी घटना के facts याद रखता है। उदाहरण के लिए जैसे आज हम किसी तेज स्पीड गाड़ी से accident होने से बाल बाल बच गए। जब भी दूसरी बार वैसी कोई घटना होने को होगी तो हिपोकम्पस पुरानी घटना को याद दिलाएगा और Amygdala हमारे अंदर चिंता और भय को जन्म देगा, जिससे हमारा शरीर अपने बचाव के लिए तैयार हो सके।
  • हिपोकम्पस हमारे बॉस का चेहरा याद रखता है लेकिन Amygdala हमें बताता है कि यह हमें नापसन्द है।

Amygdala न सिर्फ भावनाओं को उजागर करता है, बल्कि दिमाग और शरीर के दूसरे हिस्सों को भी भावनात्मक घटनाओं को याद करने के लिए अलर्ट करता है। 

  • जितना ज्यादा Amygdala उत्तेजित होता है, उतनी ही किसी घटना को याद रखने की सम्भावना होती है। 
  • इसलिए हमें हमारे साथ या किसी और के साथ हुई दुर्घटना बहुत लंबे समय तक याद रहती है।
  • यही कारण है कि महेंद्र सिंह धोनी का क्रिकेट विश्व कप फाइनल 2011 का वो मैच जिताऊ छक्का सबको अच्छी तरह से याद है, क्योंकि उस समय भावनाओं का स्तर बहुत ऊपर था।
  • इसी प्रकार आपकी पहली जॉब, पहला दोस्त और पहली कमाई सबको अच्छी तरह से याद रहती है।
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Emotions के side effects

Amygdala का एक दोष यह है कि यह घटना को अच्छी तरह से नहीं समझ सकता और सिर्फ थोड़े बहुत matching पर ही निर्भर रहता है। जैसे अगर कोई इंसान किसी झगड़ालू माँ बाप द्वारा पाला गया है तो वह छोटी सी झगड़े की घटना (या सिर्फ महसूस होने पर ही) पर बहुत ज्यादा प्रतिक्रियाएँ देता है। 

जो लोग लम्बे समय तक war zone जैसे कश्मीर, सीरिया या अफगानिस्तान जैसी जगहों पर रहे हैं, उनकी प्रतिक्रियाएँ किसी भी झगड़े की छोटी सी घटना के प्रति बहुत इमोशनल हो सकती हैं।

बच्चों में Emotions कैसे पैदा होती हैं

खासकर बच्चों पर इसका बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बचपन मे सबसे पहले हमारा Amygdala सबसे पहले विकसित होता है। उस समय हमारा Neocortex और हिपोकम्पस विकसित नहीं होते हैं। उस समय यदि बच्चों के दिमाग पर अच्छी तरह से ध्यान न दिया जाए तो, अपनी समझने की अयोग्यता के कारण बच्चे बड़े होकर इमोशनल रूप से कमजोर हो सकते हैं। इसलिए बच्चे का ध्यान रखने वाले इंसान चाहे माँ हो या पिता, उनको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों को भावनात्मक तौर पर ज्यादा complicated अवस्था मे न डालकर, उनको खुद विकसित होने का अवसर देना चाहिये।

  • उदाहरण के लिए अगर आप बच्चे की छोटी सी नासमझी पर ज्यादा गुस्सा होते हो, तो वह गुस्से को एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया समझना शुरू कर देता है, ओर बड़ा होकर ऐसे ही reaction देना शुरू कर देता है।
  • हमारी ज्यादातर भावनाऐं उस समय विकसित होती हैं, जब हम भावनाओं को अच्छी प्रकार से नहीं समझ सकते। जैसे जिसको Amygdala और Neocortex के काम करने का अंतर का ज्ञान नही है, वह इंसान भावनाओं को प्राकृतिक समझने लगता है, और उसकी वही प्रतिक्रिया उसके दिमाग में programmed हो जाती है, जिसकी वजह से वह बार बार भावनाओं में आकर उत्तेजित होता है तथा बाद में पछ्तावा होता है। मां बाप की 6 ऐसी गलतियां जो बच्चे के लिए हानिकारक हैं

निष्कर्ष

करोड़ों सालों के अनुवांशिक विकास और हमारे दिमाग की संरचना के कारण, भावनात्मक दिमाग को Thinking दिमाग की अपेक्षा प्रतिक्रिया देने में बेहतर स्थिति में है। हमारे समाज मे अभी तक IQ (तर्क बुद्धिमत्ता) को ज्यादा महत्व दिया जाता है। लेकिन जैसा कि ऊपर हम समझ चुके हैं, reaction हमारे भावनात्मक दिमाग पहले देता है। बेसक से भावनात्मक दिमाग की प्रतिक्रिया बहुत ज्यादा accurate न होकर एक rough idea की तरह होती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि भावनाओं को परिस्थितियों के हिसाब से नियंत्रित किया जाए। इसी नियंत्रण को भावनात्मक बुद्धिमत्ता या Emotional Intelligence कहते हैं।

Comments

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