भावनात्मक बुद्धिमत्ता क्या है

जीवन में खुशी और सफलता के लिए Emotional Intelligence ,बौद्धिक क्षमता से ज्यादा मायने रखती है

भावनात्मक बुद्धिमत्ता क्या है?

इसको संवेगात्मक बुद्धि, भावनात्मक बुद्धि, भावनात्मक खुफिया, भावनात्मक समझ और इमोशनल इंटेलिजेंस के नामों से भी जाना जाता है। यह भावनाओं को सही ढंग़ से समझने, प्रयोग करने और सम्भालने की क्षमता है।

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Emotional intelligence के महत्व

  • इसके द्वारा हम तनाव को दूर करना, प्रभावी ढंग से संवाद करना, दूसरों से सहानुभूति रखना जैसे काम बेहतर तरीके से कर सकते हैं
  • भावनात्मक बुद्धिमत्ता आपको मजबूत रिश्ते बनाने, शिक्षा और व्यवसाय में सफल होने, अपने करियर और व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है।
  • यह आपको अपनी भावनाओं से अंदर तक जुड़ने, इरादे को काम में बदलने और खुद के लिए महत्वपूर्ण फैसले लेने में भी मदद करती है

Emotional intelligence क्यों जरूरी है?

  • बौद्धिक तौर पर बुद्धिमान लोग इस दुनिया में अधिक सफल नहीं हैं। हमारे आस पास ऐसे लोग होते हैं जो अकादमिक रूप से तो प्रतिभाशाली हैं लेकिन अपने व्यक्तिगत सम्बधों, व्यवसाय और सामाजिक रूप से असफल होते हैं।
  • बौद्धिक क्षमता (IQ) जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है।हां, आपका IQ आपको कॉलेज में प्रवेश करने में मदद कर सकता है, लेकिन संवेगात्मक बुुद्धि या EQ परीक्षा के दौरान तनाव और भय को नियंत्रित करने में सहायता करती है।

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भावनात्मक बुद्धिमत्ता के सिद्धांत

भावनात्मक बुद्धि का जनक डेनियल गोलमैन को माना जाता है।

डेनियल गोलमैन ने भावनात्मक खुफिया के 4 सिद्धांत दिए हैं।

भावनात्मक बुद्धि के तत्व

भावनात्मक बुद्धि के मुख्य रूप से 4 आयाम होते हैं।

1.आत्म जागरूकता Self Awareness

भावनात्मक खुफिया का मूल आत्म-जागरूकता है। आत्म-जागरूकता तीन दक्षताओं से युक्त है:

  • भावनात्मक आत्म-जागरूकता, जहां आप अपनी भावनाओं को पढ़ने और समझने में सक्षम हैं और साथ ही अपने काम और रिश्तो में इसके महत्व को जानते हैं।
  • स्वयं मूल्यांकन, जहां आप खुद की ताकत और कमजोरियों का यथार्थवादी विश्लेषण कर सकते हैं।
  • आत्म-विश्वास, इसमें आपके पास सकारात्मक और मजबूत Self Confidence सेल्फ कॉन्फिडेंस होता है, जो आपको अपने काम को बेहतर तरीके से करने में मदद करता है।

इन सब क्षेत्रों में शुरुआती बिंदु, गंभीर रूप से आत्म-चिंतन Self Critical करने की क्षमता है।

2. आत्म प्रबंधन Self Management

भावनात्मक बुद्धिमत्ता का दूसरा आयाम – आत्म प्रबंधन है, यह आयाम पांच दक्षताओं से युक्त है;

  • आत्म-नियंत्रण, जो हानिकारक भावनाओं और आवेशों को नियंत्रण में रखता है।
  • पारदर्शिता, जो ईमानदारी और अखंडता के मानकों को बनाए रख रही है, अपने आप को और जिम्मेदारियों को प्रबंधित कर रही है; और
  • अनुकूलनशीलता, जो बदलती परिस्थितियों और बाधाओं पर काबू पाने के लिए परिस्थितियों के अनुकूल अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने से संबंधित है
  • उपलब्धि केन्द्रीत, जो अपने अंदर की उत्कृष्टता मानक को पूरा करने के लिए मार्गदर्शक की तरह काम करता है।
  • आत्म पहल या Self Initiative, जो अवसरों को ग्रहण करने और कार्य को खुद की लगन और जिम्मेदारी से काम को खत्म करने की कला है।
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3. सामाजिक समझ Social Awareness

सामाजिक जागरूकता तीन दक्षताओं से युक्त है;

  • सहानुभूति, जो दूसरों को समझने का गुण है और उनकी चिंताओं और कठिनाइयों में रुचि और सहानुभूति रखने केे लिए प्रेरित करता है।
  • संगठनात्मक जागरूकता, जो संगठन की कार्यप्रणाली को समझने, बेहतर फैसले लेने के लिए रिश्ते कायम करने तथा संगठन में होने वाली राजनीति में से पार पाने की क्षमता है।
  • जॉब केन्द्रित, यह ग्राहकों की जरूरतों को पहचानने और पूरा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें इंसान को अनुकूलनता के साथ-साथ परिणामों पर भी केंद्रित होना चाहिए।

4. रिश्तों का प्रबंधन Relationship Management

रिश्ते प्रबंधन का सामाजिक समूह सात दक्षताओं से युक्त है;

  • दूरदर्शी नेतृत्व, ऐसा नेतृत्व जो समूहों और व्यक्तियों को प्रेरित और निर्देशित करता है।
  • दूसरों को विकसित करना, यह प्रतिक्रिया और मार्गदर्शन के माध्यम से दूसरों की क्षमताओं को मजबूत करने की प्रवृत्ति है।
  • प्रभाव दिखाना, यह ईमानदारी और खुद्दारी के साथ दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता है। इसमें स्पष्ट, आश्वस्त और अच्छी तरह से संदेश सुनना और प्रतिक्रिया देना भी शामिल है।
  • परिवर्तन जिज्ञासा, यह नए विचारों को शुरू करने और लोगों को एक नई दिशा में लेके जाने की योग्यता है।
  • झगड़ो का निदान, यह असहमतियों का निदान और सहयोग से झगड़ों निपटारा करने की क्षमता है।
  • सम्बंध बनाना, यह दूसरों के साथ नए संबंध बनाने तथा उनको बनाये रखने की कला है।
  • टीम वर्क और सहयोग, जो टीमों में परस्पर सहयोग तथा उसको प्रसारित करने की कला है।

निष्कर्ष

भावनात्मक बुद्धिमत्ता का दायरा बहुत बड़ा है। लेकिन इसका प्रभाव जीवन के हर पहलू पर पड़ता है। कुछ भावनाएं हमारे जीने के लिए बहुत जरूरी हैं, जैसे खतरे का डर जो आपातकाल स्थिति में हमारे शरीर को प्रतिक्रिया के लिए तैयार करता है। इसके विपरीत चिंता और अवसाद जैसी भावनाएं हमारे जीवन और स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हैं। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि दोनों तरह की भावनाओं में सतुंलन बनाया जाए।

भावनात्मक बुद्धि के महत्व को देखते हुए हमें इसको विकसित करने की कोशिश करते रहना चाहिए।

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सवाल जवाब

भावनात्मक बुद्धि क्या होती है

यह बुद्धि अपनी भावनाओं को जानने, समझने और नियंत्रित करने की प्रक्रिया है। जिस प्रकार गणित के सवाल समझने के लिए IQ की जरूरत होती है, वैसे ही खुद की और दूसरों की भावनाओं को समझने के लिए EQ यानी Emotional Intelligence होती है

भावनात्मक बुद्धि की खोज किसने की थी

वैसे तो व्यवहार को लेकर 19वीं शताब्दी से ही शोध हो रहे हैं। लेकिन भावनात्मक बुद्धि को विश्व स्तर पर पहचान डेनियल गोलमैन की किताब Emotional Intelligence से ही मिली है।

क्या भावनात्मक बुद्धि जन्म से ही तय होती है

भावनात्मक बुद्धि के विकास में इंसान के बचपन का बहुत बड़ा रोल होता है। क्योंकि इंसान की दिमागी समझ विकसित होने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए लगभग 16 साल की उम्र तक इंसान भावनाओं के नियंत्रण में ज्यादा रहता है। अतः ये बहुत जरूरी है कि हम बच्चों के साथ बहुत सोच समझकर व्यवहार करें।

क्या भावनात्मक बुद्धि को बदला जा सकता है

सबसे बेहतर बात यह है कि मेहनत और अनुशासन से भावनात्मक बुद्धि को सुधारा जा सकता है। ये 7 ऐसे तरीके हैं जिनसे अपनी भावनात्मक बुद्धि को सुधारा जा सकता है

मेरे लिये भावनात्मक बुद्धि क्यों जरूरी है

आपके द्वारा पढ़े गए गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, समाज शास्त्र, इतिहास, कम्प्यूटर आदि सब एक अच्छी नॉकरी या व्यापार शुरू करने के लिए सहयोग कर सकते हैं। जबकि आप उस नॉकरी या व्यापार का प्रेसर सहन कर पाएंगे या नहीं, ये आपकी भावनात्मक बुद्धि पर निर्भर करता है। अगर आपकी भावनाऐं नियंत्रण में नहीं हैं तो आप चिंता, गुस्सा, डिप्रेशन, दुख, तनाव आदि से ग्रसित हो सकते हैं और ज्यादा होने पर आत्महत्या तक कर सकते हैं। भावनात्मक बुद्धि की ज़रूरतों को detail में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Comments

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